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Showing posts from April, 2023

नसीब

नसीब ----- नसीब है। मूर्त से अमूर्त। इंसान से भगवान। संघर्ष से पलायन। अकर्म से फल। युद्ध से समर्पण। अधिकार से आलस्य। विजय से भय। हत्या से परहेज। मस्तिष्क से हृदय। ईर्ष्या और लोभ। असंतुष्टता और खीझ। अवसर का अभाव। अन्याय को नमन। अतृप्त मन का देह। दोस्त से अप्रतिस्पर्द्धा। दुश्मन से दुराव। परंपरा का पालन। परिपाटी को प्रणाम। आशीर्वाद की आकांक्षा। जिंदगी का ठहराव। ‘होने’ का नहीं विरोध। प्रतिबंध मान्य। जातिप्रथा मानना सामान्य। धर्म ध्वजा फहराव। खुद से खुद का है भटकाव। -----------------

नये वर्ष का भाग्य

नये वर्ष का भाग्य -------------------------- दिन, महीने, वर्ष। सत्ता संघर्ष। पुन: गिड़गिड़ाएगा आदर्श। पल,छिन,घड़ी। स्वनाम धन्य मढ़ी। पुन: करेगा गड़बड़ी। लोभ,ईर्ष्या,स्वार्थ। लक्षित रहेगा पदार्थ। इंसान भुलाता रहेगा परमार्थ। शांति हेतु प्रार्थना। विफल रहेगा मानना। जन्मेगा पुन: नयी प्रताड़ना। अभिमान और अहंकार। गलियों में गुजरेगा साकार। जश्न मनाएगा पुन: संहार। विषाद,व्यथा,दर्द। सम्पूर्ण और अर्द्ध। निगलता रहेगा पुन: मर्द। अपना अपना भय। खुद से खुद का पराजय। आदमीयत पुन: करेगा क्षय। मन और तन की नग्नता। धर्म व संप्रदाय की भग्नता। बनाए रखेगा पुन: संलग्नता। हथियारों के नए नस्ल। उगाये जाएंगे जैसे कि फस्ल। आदमी के शक्लों से निकलेंगे पुन: नए-नए शक्ल। आँसू,आह और मर्मांतक कराह। क्रंदन,विलाप अथाह। हर रौशनी को करेगा पुन: स्याह। असमंजस में रिश्ते। गरीबी अमीरी के भिड़ते। जैसे रहे रिसते पुन: रहेंगे रिसते। स्वर्ग-सुख की भावना। अच्छे दिनों की कामना। मरेगी इनकी पुन: संभावना। सुख की अदम्य चाहना। ‘होगी कभी स्याह ना’। होगी कुंठित पुन: ये धारणा। --------------------------...

औरतें

औरतें --------------------- झगड़ रहे बच्चों के झगड़े में बच्चों की परवाह दिखाकर झगड़ती औरतें। मातृत्व से स्खलित औरतें। माँ की हर सीख आत्मसात् करती पुत्रियाँ औरतें। माँ को अपना आदर्श बनाने को संकल्पित औरतें। आगत स्थितियों में माँ के निर्णय स्मरण करती परिपक्वता बरतती औरतें। सास के आदेशों की अवहेलना करती अपना व्यक्तित्व स्थापित करती बहू औरतें। गलत निर्णयों को व्याख्यायित करती जागरूक औरतें। जेठानी के नक्शे-कदम को साफ-सुथरा करती सहेली सी देवरानी औरतें। रसोई में अपना हक बनाती और बताती सुघड़ गृहस्थिन औरतें। ननद की परवाह करती अभिभावक औरतें। मर्यादा बताती और मर्यादा में परिवार को सीमित करती प्रबुद्ध औरतें। प्रतिकूल परिस्थितियों में पति के पास खड़ी पत्नी,सहयोगिनी मर्दानी औरतें। बुरे कर्म और बुरे विचार पर पतियों को भी धमकाती सयानी औरतें। बलात्कार और अपमान से बचने हेतु जौहर करती औरतें। वतन की बात आए तो तीर,तलवार,भाले,बम आदि हाथों में उठाती औरतें। सेवा,सुषुर्शा करीने से करती वत्सला औरतें। गृहस्थी संभालती लक्ष्मी सी गृहलक्ष्मी चंचला औरतें। ...