नये वर्ष का भाग्य

नये वर्ष का भाग्य -------------------------- दिन, महीने, वर्ष। सत्ता संघर्ष। पुन: गिड़गिड़ाएगा आदर्श। पल,छिन,घड़ी। स्वनाम धन्य मढ़ी। पुन: करेगा गड़बड़ी। लोभ,ईर्ष्या,स्वार्थ। लक्षित रहेगा पदार्थ। इंसान भुलाता रहेगा परमार्थ। शांति हेतु प्रार्थना। विफल रहेगा मानना। जन्मेगा पुन: नयी प्रताड़ना। अभिमान और अहंकार। गलियों में गुजरेगा साकार। जश्न मनाएगा पुन: संहार। विषाद,व्यथा,दर्द। सम्पूर्ण और अर्द्ध। निगलता रहेगा पुन: मर्द। अपना अपना भय। खुद से खुद का पराजय। आदमीयत पुन: करेगा क्षय। मन और तन की नग्नता। धर्म व संप्रदाय की भग्नता। बनाए रखेगा पुन: संलग्नता। हथियारों के नए नस्ल। उगाये जाएंगे जैसे कि फस्ल। आदमी के शक्लों से निकलेंगे पुन: नए-नए शक्ल। आँसू,आह और मर्मांतक कराह। क्रंदन,विलाप अथाह। हर रौशनी को करेगा पुन: स्याह। असमंजस में रिश्ते। गरीबी अमीरी के भिड़ते। जैसे रहे रिसते पुन: रहेंगे रिसते। स्वर्ग-सुख की भावना। अच्छे दिनों की कामना। मरेगी इनकी पुन: संभावना। सुख की अदम्य चाहना। ‘होगी कभी स्याह ना’। होगी कुंठित पुन: ये धारणा। -------------------------------------- अरुण कुमार प्रसाद 01/01/23

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