प्रार्थना है हमारे घर भी आना

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उजाले तुम हमारे घर भी आना ।

अंधेरे में बहुत डूबा हुआ हूँ।

सुनो खुशियाँ हमारे घर भी आना।

व्यथाओं में बहुत डूबा हुआ हूँ।

प्रभु हे! तुम हमारे घर भी आना।

शून्यता में बहुत डूबा हुआ हूँ।

ज्ञान तुम भी हमारे घर में आना।

मूर्खता में बहुत डूबा हुआ हूँ।

दया,करुणा हमारे घर भी आना।

घृणा में मैं बहुत डूबा हुआ हूँ।

त्याग,तप हमारे घर भी आना।

लोभ-लालच में फँसा,डूबा हुआ हूँ।

शांत मन तुम हमारे घर को आना।

लड़ाई-झगड़े में बहुत डूबा हुआ हूँ।

नम्रता तुम हमारे घर भी आना।

अहंकार में बहुत डूबा हुआ हूँ।

इंसानियत तुम हमारे घर भी आना।

शैतानियों में बहुत डूबा हुआ हूँ।

अहो ऐश्वर्य! हमारे घर भी आना।

दरिद्रताओं में बहुत डूबा हुआ हूँ।

भई!उपकार,हमारे घर भी आना।

अनेकों स्वार्थ में डूबा हुआ हूँ।

सुनो सौभाग्य, हमारे घर भी आना।

बड़े दुर्भाग्य में डूबा हुआ हूँ।

राष्ट्र-भक्ति हमारे घर भी आना।

स्वयं की भक्ति में डूबा हुआ हूँ।

शुभता तुम हमारे घर भी आना।

अशुभता में ये घर डूबा हुआ है।

गौरव-राष्ट्र का सबको जगाना।

गहरी नींद में सोया हुआ है।

अरे वरदान, हमारे घर को आना।

अभिशापों में बहुत डूबा हुआ हूँ।

अगर आओ तो दस्तक दे के आना।

प्रार्थनाओं में बहुत डूबा हुआ हूँ।

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अरुण कुमार प्रसाद

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